क्रिप्टो घोटाले पर ईडी का शिकंजा : हिमाचल और पंजाब में कुल आठ ठिकानों पर छापेमारी  

हिमाचल प्रदेश से जुड़े एक बड़े फर्जी क्रिप्टो करेंसी पोंजी और मल्टी लेवल मार्केटिंग घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने सख्त कार्रवाई की है।

Dec 15, 2025 - 16:39
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क्रिप्टो घोटाले पर ईडी का शिकंजा : हिमाचल और पंजाब में कुल आठ ठिकानों पर छापेमारी  
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला     15-12-2025

हिमाचल प्रदेश से जुड़े एक बड़े फर्जी क्रिप्टो करेंसी पोंजी और मल्टी लेवल मार्केटिंग घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने सख्त कार्रवाई की है। ईडी शिमला ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत हिमाचल प्रदेश और पंजाब में कुल आठ ठिकानों पर छापेमारी की। 

जांच में सामने आया है कि इस घोटाले के जरिए हिमाचल और पंजाब के लाखों लोगों से करीब 2300 करोड़ रुपये की ठगी की गई। ईडी ने यह जांच हिमाचल प्रदेश और पंजाब के विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। इन मामलों में सुभाष शर्मा को इस फर्जी क्रिप्टो घोटाले का मास्टरमाइंड बताया गया है। 

सुभाष शर्मा वर्ष 2023 में देश छोड़कर फरार हो गया था। उसके अलावा कई अन्य सहयोगियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, चिट फंड अधिनियम, 1982, अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध अधिनियम, 2019 और अन्य संबंधित कानूनों के तहत मामले दर्ज हैं।

ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने कोर्वियो, वॉस्क्रो, डीजीटी, हाइपनैक्स्ट और ए-ग्लोबल जैसे नामों से फर्जी क्रिप्टो प्लेटफॉर्म शुरू किए। इन प्लेटफॉर्मों के जरिए हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों के भोले-भाले निवेशकों को बहुत ज्यादा मुनाफे का लालच दिया गया।  

ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि इस पोंजी स्कीम में कई लोग कमीशन एजेंट के रूप में काम कर रहे थे। ये लोग नए निवेशकों को योजना में जोड़ने के बदले करोड़ों रुपये का कमीशन कमा रहे थे। लोगों को आकर्षित करने के लिए विदेश यात्राओं का लालच दिया गया और बड़े स्तर पर प्रचार कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनका इस्तेमाल योजना को फैलाने के लिए किया गया।

ईडी की छापेमारी के दौरान तीन लॉकरों को फ्रीज किया गया है और लगभग 1.2 करोड़ रुपये की बैंक जमा और फिक्स्ड डिपॉजिट जब्त किए गए हैं। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, निवेशकों का डाटा, कमीशन से जुड़े रिकॉर्ड और अचल संपत्तियों में निवेश से संबंधित कागजात भी बरामद किए गए हैं। इनमें कई बेनामी संपत्तियों से जुड़े सबूत भी शामिल हैं, जो पोंजी स्कीम से कमाई गई रकम से खरीदी गई थीं।

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