प्रदेश में आपदा प्रभावितों के लिए बैंक विशेष राहत पैकेज देने की तैयारी में, कमेटी एक सप्ताह में तैयार करेगी प्रस्ताव 

हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रभावितों के लिए बैंक विशेष राहत पैकेज देने की तैयारी में हैं। शिमला में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय निदेशक की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित

Sep 27, 2025 - 11:39
Sep 27, 2025 - 11:43
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प्रदेश में आपदा प्रभावितों के लिए बैंक विशेष राहत पैकेज देने की तैयारी में, कमेटी एक सप्ताह में तैयार करेगी प्रस्ताव 

यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    27-09-2025

हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रभावितों के लिए बैंक विशेष राहत पैकेज देने की तैयारी में हैं। शिमला में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय निदेशक की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की। प्रदेश के लाखों ऋण धारकों को राहत देने के लिए कमेटी एक सप्ताह में प्रस्ताव तैयार करेगी। 

बैठक में कृषि, एमएसएमई और अन्य ग्राहकों के ऋणों का पुनर्गठन करने के लिए पैकेज देने पर सहमति बनी। सक्सेना ने कहा कि आपदा के कारण कई ऋणधारकों की अदायगी क्षमता प्रभावित हुई है। ऐसे में अदायगी को पुनर्निर्धारित करने का प्रस्ताव बैंक घोषित करेंगे।

उन्होंने कहा कि हाल ही में आई आपदा से प्रदेश में भारी नुकसान हुआ है। प्रदेश में साढ़े छह लाख कृषि संबंधी खाते, करीब दो लाख एमएसएमई और आठ लाख अन्य खाताधारक प्रभावित हुए हैं। 

कमेटी में नाबार्ड, बैंकर्स समिति, राजस्व, वित्त विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। रिपोर्ट तैयार होने के बाद कमेटी पत्र जारी करेगी, ताकि राहत मिले। वित्त सचिव अभिषेक जैन, यूको बैंक सीईओ एमडी अश्वनी कुमार, आरबीआई के क्षेत्रीय निदेशक अनुपम किशोर, नाबार्ड के सीजीएम विवेक पठानिया आदि मौजूद रहे। 

बैठक में राहत देने के लिए कई प्रस्ताव रखे। समिति ने कहा कि पुनर्गठित ऋणों पर एक वर्ष की ऋण स्थगन अवधि दी जा सकती है। इसमें कोई ब्याज संयोजन नहीं होगा और न दंडात्मक शुल्क वसूलेंगे। पुनर्गठन में अतिरिक्त जमानत या गारंटी की मांग नहीं की जाएगी। जिन किसानों की फसल हानि 33 प्रतिशत से अधिक प्रमाणित होगी, उन्हें पुनर्गठन की सुविधा दे सकते हैं। 

फसल नुकसान का प्रमाणपत्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी जारी करेंगे। फसल ऋण को टर्म लोन में बदला जा सकता है। 33 से 50 फीसदी नुकसान पर अधिकतम 2 वर्ष में पुनर्भुगतान (1 वर्ष मोरेटोरियम सहित) करना होगा। 50 फीसदी से अधिक नुकसान पर अधिकतम 5 वर्ष में पुनर्भुगतान (1 वर्ष मोरेटोरियम सहित) करना होगा। 

कृषि एवं सहायक गतिविधियों को छोड़कर एमएसएमई, रिटेल व अन्य सेक्टर के मौजूदा कर्जदारों को भी पुनर्गठन का विकल्प दिया जा सकता है। पुनर्गठित ऋणों व नए फसल ऋणों को स्टैंडर्ड एसेट की श्रेणी में ही रखा जाएगा।

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