आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी साहबजादों की कुर्बानी , बीरबल दिवस के मौके पर बोले , नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर

पूर्व मुख्यमंत्री नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह के साहबज़ादों की कुर्बानी हमेशा आने वाली पीढियां को प्रेरित करती रहेगी। उनकी कुर्बानी हमेशा यह संदेश देती रहेगी की किसी भी पाशविक बर्बरता से कोई मानवता और दृढ़ संकल्प को  कभी भी नहीं हरा सकता। जिस समय मुगलिया बर्बरता के सामने न झुकते हुए दोनों  साहबजादों ने अपनी कुर्बानी दी थी उस समय उनकी उम्र मात्र 6 साल और 9 साल थी। मनुष्यता के इतिहास में अबोध बालकों के साथ इस तरीके की बर्बरता की मिसाल कहीं और नहीं मिलती है

Dec 26, 2024 - 19:38
Dec 26, 2024 - 21:49
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आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी साहबजादों की कुर्बानी , बीरबल दिवस के मौके पर बोले , नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर
यंगवार्ता न्यूज़ - मंडी  26-12-2024
पूर्व मुख्यमंत्री नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह के साहबज़ादों की कुर्बानी हमेशा आने वाली पीढियां को प्रेरित करती रहेगी। उनकी कुर्बानी हमेशा यह संदेश देती रहेगी की किसी भी पाशविक बर्बरता से कोई मानवता और दृढ़ संकल्प को  कभी भी नहीं हरा सकता। जिस समय मुगलिया बर्बरता के सामने न झुकते हुए दोनों  साहबजादों ने अपनी कुर्बानी दी थी उस समय उनकी उम्र मात्र 6 साल और 9 साल थी। मनुष्यता के इतिहास में अबोध बालकों के साथ इस तरीके की बर्बरता की मिसाल कहीं और नहीं मिलती है। धर्म परिवर्तन के नाम पर मासूम बच्चों को दीवारों में चुनवाने वाली बर्बरता के सामने न झुकने वाला बलिदान भी दुनिया के इतिहास में बिरले ही देखने को मिलता है। खिलौनों से खेलने की उम्र में साहिबजादे 9 साल के जोरावर सिंह और 6 साल के फतेह सिंह का अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए दिए गए बलिदान के प्रति आज सारा देश कृतज्ञ हैं। साहिबजादों द्वारा दिखाई गई राह हमारे भविष्य का पथ भी प्रशस्त करती रहेगी। 
जयराम ठाकुर ने कहा कि मैं समूचे देश की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने साहबज़ादों की शहादत के दिन को ’वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाने का निश्चय किया।  जिस देश के लोग जान सके की किस तरह की पाशविकता और बर्बरता निकल कर हम बाहर आए हैं और आज जो दिन हम देख रहे हैं उसके लिए हमारे पूर्वजों ने कितनी यातनाएं सही हैं और कितनी कुर्बानियां दी हैं। बलिदान की गाथा गुरु अर्जन देव के बलिदान से ही शुरू हुई थी। गुरु तेग बहादुर जी को डराने और धर्म परिवर्तन के लिए उनके सामने ही उनके भाई  मतिदास जी को आरे से चीरा गया। मतिदास जी के बाद भाई दयाला जी को उबलते पानी में फेंक दिया गया और फिर भाई  सती दास जी को जिंदा जला दिया गया। गुरु तेग बहादुर फिर भी इस्लाम अपनाने को राजी नहीं हुए तो औरंगजेब के आदेश पर गुरुजी को चांदनी चौक लाया गया और तलवार से उनकी गर्दन को धड़ से अलग कर दिया गया फिर फरमान यह दिया गया कि कोई भी उनका अंतिम संस्कार नहीं करेगा। 
यातना का यह दौर बहुत लंबा और भयावह रहा है, इसलिए देश के लोगों को यह जानना चाहिए कि लोकतंत्र के क्या-क्या हुआ था इसलिए ’वीर बाल दिवस’ के माध्यम से देशवासियों को बताने की आवश्यकता है। यह बातें उन्होंने मंडी के नाचन विधानसभा क्षेत्र के हटगढ़ सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहीं। उन्होंने कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के मेधावी छात्रों को भी सम्मानित किया। इस मौके पर उनके साथ नाचन के विधायक विनोद कुमार और मंडी के जिला अध्यक्ष निहालचंद शर्मा एवं विधायक प्रबंधन समिति के साथ साथ भारी संख्या में छात्र, उनके परिजन उपस्थित रहे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अखबारों के माध्यम से पता चल रहा है कि सरकार ने सभी विभागों को पत्र लिखकर नई भर्ती,  नए संस्थान और पुराने संस्थानों  के स्तरोन्नत पर रोक लगा दी है। 
जिसका मतलब अब न कोई नए संस्थान खुलेंगे और नहीं नई भर्तियां हो पाएंगी। पहले सरकार द्वारा युवाओं को नौकरी देने पर अघोषित रूप से रोक लगाई थी, पद समाप्त किया जा रहे थे, आउटसोर्सिंग पर लगे लोगों को निकाला जा रहा था। अब सरकार द्वारा सभी विभागों को इसके लिए आधिकारिक पत्र लिख दिया गया है। जिससे अब सारी उम्मीदें  स्वतः: समाप्त हो गईं हैं। सरकार द्वारा यह रोक भले ही 3 महीने के लिए लगाई गई है लेकिन इससे सरकार की नीयत साफ नजर आ रही है कि वह प्रदेश के लोगों को रोजगार नहीं देना चाहती है।

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