पहाड़ी राज्यों को विशेष वित्तीय पैकेज दे केंद्र , समृद्ध हिमाचल 2045 संगोष्ठी के शुभारम्भ में बोले , उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री 

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी यह जानती थीं कि हिमाचल प्रदेश एक छोटा पहाड़ी क्षेत्र है और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां होने के कारण इस राज्य को आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इसके बावजूद इंदिरा गांधी ने क्षेत्र के लोगों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और भावनाओं को अधिमान देते हुए हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्यत्व का दर्जा प्रदान किया

Mar 23, 2025 - 15:35
Mar 23, 2025 - 15:54
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पहाड़ी राज्यों को विशेष वित्तीय पैकेज दे केंद्र , समृद्ध हिमाचल 2045 संगोष्ठी के शुभारम्भ में बोले , उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री 
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  23-03-2025

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी यह जानती थीं कि हिमाचल प्रदेश एक छोटा पहाड़ी क्षेत्र है और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां होने के कारण इस राज्य को आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इसके बावजूद इंदिरा गांधी ने क्षेत्र के लोगों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और भावनाओं को अधिमान देते हुए हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज्यत्व का दर्जा प्रदान किया। उपमुख्यमंत्री शनिवार को यहां डा. मनमोहन सिंह, हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान में तीन दिवसीय संगोष्ठी श्रृंखला के शुभारंभ के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। 
विचार मंथन ‘समृद्ध हिमाचल 2045’ के अवसर पर संगोष्ठी श्रृंखला के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के सतत आर्थिक विकास के लिए 20 वर्षीय योजना तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के दौरान सहयोगात्मक चर्चाओं के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को सतत विकास और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बनाते हुए दीर्घकालिक लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए नवीन समाधान खोजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि विचार मंथन में शामिल वक्ताओं द्वारा हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर तथा समृद्ध बनाने के लिए दिए गए सुझावों को हम राज्य के विकास के लिए अमल में लाएंगे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल के पास आय के सीमित साधन हैं।

राज्यों को यदि नई दिल्ली से केंद्र सरकार के निर्णयों पर अमल करने का निर्देश आता है तो इसके पालन के लिए हमारे राज्य को अन्य बड़े राज्यों के समान नहीं आंका जाना चाहिए। दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े प्रदेशों के पास बड़े-बड़े उद्योगों सहित आय के कई साधन हैं, जबकि इसकी तुलना में हिमाचल के पास काफी सीमित साधन हैं। ऐसे में केंद्रीय परियोजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए हिमाचल जैसे पहाड़ी क्षेत्रों के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जो हिमाचल को अपना दूसरा घर बताते हैं उन्हें इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हिमाचल के पक्ष में निर्णय आने के बावजूद आज तक हमें चंडीगढ़ में अपने हिस्से का 7.19 प्रतिशत हिस्सा नहीं मिल पाया है।

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