आरडीजी बंद कर वित्त आयोग ने छोटे पर्वतीय राज्यों की विकास आवश्यकताएं की नजर अंदाज  

आरडीजी बंद कर वित्त आयोग ने छोटे पर्वतीय राज्यों की विकास आवश्यकताएं नजरअंदाज की हैं। सोमवार को विधानसभा सदन में रखे गए राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल के लिखित अभिभाषण में 16वें वित्तायोग की अनुशंसा को संविधान के अनुछेद 275 (1) की भावना के खिलाफ बताया गया

Feb 17, 2026 - 12:04
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आरडीजी बंद कर वित्त आयोग ने छोटे पर्वतीय राज्यों की विकास आवश्यकताएं की नजर अंदाज  
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    17-02-2026

आरडीजी बंद कर वित्त आयोग ने छोटे पर्वतीय राज्यों की विकास आवश्यकताएं नजरअंदाज की हैं। सोमवार को विधानसभा सदन में रखे गए राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल के लिखित अभिभाषण में 16वें वित्तायोग की अनुशंसा को संविधान के अनुछेद 275 (1) की भावना के खिलाफ बताया गया। अभिभाषण के माध्यम से बताया गया कि हिमाचल अपने संसाधनों के बल पर आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं जारी नहीं रख सकता। 

वित्तीय अनुशासन से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए किए प्रयासों का भी अभिभाषण में उल्लेख किया गया। भारत के संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत प्रत्येक पांच वर्ष के बाद एक वित्त आयोग का गठन किया जाता है, जो संघ और राज्यों के बीच करों की शुद्ध आय के वितरण तथा राज्यों को भारत की संचित निधि से राजस्व सहायता अनुदान देने के सिद्धांतों पर अनुशंसा करता है।

वित्त आयोग स्थानीय निकायों और आपदा प्रबंधन के लिए भी अनुदान की अनुशंसा करता है। भारत के संविधान का अनुच्छेद 275 (1) उन राज्यों को ऐसे अनुदान प्रदान करने का प्रावधान करता है, जो अपनी राजस्व प्राप्तियों और व्यय के बीच की खाई को पाट नहीं सकते। 16वां वित्त आयोग 31 दिसंबर 2023 को गठित किया गया था। 

आयोग ने अपनी रिपोर्ट 17 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति को प्रस्तुत की। यह रिपोर्ट एक फरवरी 2026 को संसद में रखी गई और केंद्र सरकार ने स्वीकार की। आरडीजी छोटे राज्यों विशेषकर हिमाचल प्रदेश के लिए राजस्व घाटा पाटने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो रहा है। लेकिन 16वें वित्त आयोग ने इसे बंद करने की अनुशंसा की है। राज्यपाल के लिखित अभिभाषण में बताया गया कि आरडीजी की अनुशंसा सभी पूर्ववर्ती वित्त आयोगों ने की है।

यह पहली बार है कि वित्त आयोग ने छोटे पर्वतीय राज्यों की विकास आवश्यकताओं को नजरअंदाज किया है और उनकी विशिष्ट भौगोलिक जलवायु परिस्थितियों, छोटी अर्थव्यवस्था तथा सीमित संसाधन आधार के कारण होने वाली लागत अक्षमताओं पर विचार नहीं किया। 16वें वित्त आयोग (2026-31) ने इस संदर्भ में अपनी अनुशंसा में आरडीजी को शून्य कर दिया है। 

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