शिक्षा क्षेत्र में प्रो. सिम्मी की उपलब्धियां हर बच्ची के लिए प्रेरणादायक : डॉ. आस्था

प्रख्यात शिक्षाविद स्वर्गीय प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के 56वें जन्मदिन पर रविवार को हरोली के कॉलेज परिसर में आयोजित ‘एहसास’ कार्यक्रम में उनकी पुण्य स्मृतियों को नमन किया गया। प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सूफी गायक लखविंदर वडाली ने अपनी रूहानी गायकी से स्मृतियों के ‘एहसास’ को सुरों से महकाया

Sep 29, 2024 - 22:30
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शिक्षा क्षेत्र में प्रो. सिम्मी की उपलब्धियां हर बच्ची के लिए प्रेरणादायक : डॉ. आस्था
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यंगवार्ता न्यूज़ - ऊना    29-09-2024

प्रख्यात शिक्षाविद स्वर्गीय प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के 56वें जन्मदिन पर रविवार को हरोली के कॉलेज परिसर में आयोजित ‘एहसास’ कार्यक्रम में उनकी पुण्य स्मृतियों को नमन किया गया। प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सूफी गायक लखविंदर वडाली ने अपनी रूहानी गायकी से स्मृतियों के ‘एहसास’ को सुरों से महकाया। 

इस अवसर को हर श्रोता के लिए एक बेजोड़ आत्मिक अनुभव में बदल दिया। कार्यक्रम में प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के पति उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, उनकी बेटी डॉ. आस्था अग्निहोत्री, और अन्य व्यक्तियों ने प्रो. सिम्मी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर भावनाओं और संवेदनाओं से भरे जनसमूह ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम में अपनी आदरांजलि व्यक्त करते हुए डॉ. आस्था अग्निहोत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में प्रो. सिम्मी की उपलब्धियां हर बच्ची को प्रेरणा देने वाली हैं। उनके जीवन से यह सीख मिलती है कि कोई व्यक्ति जीवन में कहां पहुंचेगा, क्या मुकाम हासिल करेगा, ये जीवन की बाधाओं में आगे बढ़ते जाने का जज्बा और आपके कर्म, संघर्ष और मेहनत तय करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री का जीवन एक दीपक की तरह था, जिन्होंने अनगिनत जीवनों को रोशन किया। वे एक साधारण परिवार में जन्मीं, लेकिन अपनी मेहनत, संघर्ष और आगे बढ़ने के जुनून से उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में बड़ी से बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के निधन के बाद दुख की घडि़यों में मजबूत साथ के लिए हरोली समेत सभी हिमाचल वासियों का आभार जताया।

29 सितंबर 1968 को मंडी में जन्मीं प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री का नाम शिक्षा के आकाश में एक नक्षत्र की तरह चमकता रहेगा। वे 9 फरवरी 2024 को अपनी सांसारिक यात्रा पूरी करके माता श्री चिंतपूर्णी की दिव्य ज्योति में विलीन हो गईं। लेकिन अपने छोटे से जीवन काल में उनकी अनगिनत अकादमिक उपलब्धियां अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक मंचों पर भारतीय शिक्षा का प्रतिनिधित्व करती हैं। 

हरोली कॉलेज का नामकरण प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री के नाम पर करना यहां पढ़ने वाले हर विद्यार्थी के लिए ज्ञान की वृहद परंपरा से जुड़ने और असाधारण शैक्षणिक कर्तृत्व संपन्न व्यक्तित्व से जुड़ने का गौरव प्रदान करता है। उत्कृष्ट शिक्षा केंद्र की तरह विकसित किया जा रहे प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री कॉलेज हरोली में मानविकी, विज्ञान और वाणिज्य स्ट्रीम के सभी विषयों के साथ साथ बीबीए और बीसीए जैसे व्यवसायिक कोर्स और ललित कलाओं में म्यूजिक समेत अन्य विधाओं में भी डिग्री कोर्सज उपलब्ध हैं।

प्रो. सिम्मी का जन्म मंडी नगर का है, बचपन से ही अध्ययनशील, विलक्षण मेधा सम्पन्न सिम्मी ने वहां राजकीय कन्या विद्यालय से स्कूली पढ़ाई और वल्लभ डिग्री कॉलेज मंडी से ग्रेजुएशन के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमफिल और पीएचडी की। स्कूली दिनों से ही पढ़ाई में अव्वल रहने पर उन्हें स्कॉलरशिप मिलने का जो सिलसिला आरंभ हुआ वो पीएचडी पर्यंत जारी रहा।

उनकी असाधारण अकादमिक यात्रा ने उन्हें एक आदर्श शिक्षाविद के रूप में स्थापित किया। विद्यार्थियों की चहेती, पसंदीदा टीचर, उत्कृष्ट शिक्षाविद, प्रो. सिम्मी ने अनेकों विद्यार्थियों को पीएचडी और एमफिल की रिसर्च में गाइड किया। प्रो. सिम्मी के विद्वतापूर्ण लेख और शोध पत्र न केवल शिक्षा की दुनिया में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी बहुत मजबूत और गहन विचार प्रस्तुत करते हैं।

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की प्रोफेसर के रूप में अपने ज्ञान और अनुभव से उन्होंने अनगिनत जीवनों को रोशन किया। विभाग की 3 बार चेयरपर्सन रहते हुए उन्होंने न केवल अपने विषय में गहराई से योगदान दिया, बल्कि अपने विद्यार्थियों को भी एक नई दिशा दिखाने का काम किया, उन्होंने ज्ञान का ऐसा दीप जलाया, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

धर्मपत्नी के रूप में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री का संबल बनीं प्रो. सिम्मी सबके लिए स्नेह, समझदारी व सीख का भंडार थीं । इरादों की ऐसी अटल कि लगातार 5 बार विधायक के रूप में रिकॉर्ड मतों से विजयी रहे। अग्निहोत्री की पांचों जीत में निर्णायक भूमिका निभाने वाली प्रो. सिम्मी नंगे पांव माता चिंतपूर्णी, माता ज्वालामुखी, बगलामुखी जी, शीश नवाने घर से पैदल पहुंचतीं।

प्रो. सिम्मी ने अपनी इकलौती बेटी डॉ. आस्था अग्निहोत्री को जो समृद्ध संस्कार दिए, ऊंची शिक्षा दी उनका सुफल है कि वे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से ह्यूमन राइट्स में पीएचडी तथा हेग एकेडमी ऑफ इंटरनेशनल लॉ से उच्चतर शिक्षा प्राप्त करके अपनी मां प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री की शिक्षा, ज्ञान और समाज विकास की महान परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर डॉ. आस्था प्रो. सिम्मी की तरह ही स्पष्ट सोच की एक दृढ़ व्यक्तित्व और उन्हीं की तरह मददगार हैं।

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