हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया की खारिज
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इस नियुक्ति के लिए राज्यपाल द्वारा तैयार की गई चयन समिति को खारिज करते हुए इस चयन समिति की सभी गतिविधियों को निरस्त कर दिया

यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 28-03-2025
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इस नियुक्ति के लिए राज्यपाल द्वारा तैयार की गई चयन समिति को खारिज करते हुए इस चयन समिति की सभी गतिविधियों को निरस्त कर दिया। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति यानी राज्यपाल ने इस चयन समिति का गठन किया था।
न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता अजयदीप बिंद्रा द्वारा दायर याचिका को स्वीकारते हुए यह फैसला सुनाया। प्रार्थी चौधरी श्रवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में कृषि विज्ञान विभाग में प्रोफेसर/प्रधान वैज्ञानिक हैं। इस विश्वविद्यालय की स्थापना हिमाचल प्रदेश कृषि, बागबानी और वानिकी विश्वविद्यालय अधिनियम 1986 के तहत की गई है।
याचिकाकर्ता का आरोप था कि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति ने पहले अधिनियम की धारा 24 के प्रावधानों के विपरीत कुलपति के रूप में नियुक्ति के लिए कुलाधिपति को नामों का एक पैनल सुझाने के लिए चयन समिति का गठन किया और उसके बाद चयन समिति ने एक विज्ञापन जारी किया, जिसमें कुछ शर्तें निर्धारित की गई थीं, जो अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत थी।
राज्यपाल यानी कुलाधिपति की ओर से बताया गया था कि कुलपति कार्यालय ने चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में सदस्यों में से एक को अधिसूचित करने के लिए सहमति प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष और महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली को पत्र लिखे थे। इसके जवाब में महानिदेशक, आईसीएआर ने स्वयं लगभग छह महीने बाद (जनवरीए 2024 में) अपने उप महानिदेशक, आईसीएआर, नई दिल्ली के नाम की सिफारिश चयन समिति में उनके नाम पर विचार करने के लिए की।
विश्वविद्यालय में पूर्णकालिक कुलपति की नियुक्ति का मामला महानिदेशक, आईसीएआर से आवश्यक प्रतिक्रिया के अभाव में पहले ही छह महीने से अधिक समय से विलंबित था, इसलिएए तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए महानिदेशक की जगह उप महानिदेशक, आईसीएआर की सिफारिश पर विचार किया गया और उनका नाम 24-04-2024 की अधिसूचना में दर्शाया गया है।
कोर्ट ने मामले से जुड़े रिकार्ड का अवलोकन करने के पश्चात कहा कि चयन समिति का गठन स्पष्ट रूप से विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 24 में निहित प्रावधानों का उल्लंघन है और इसलिए इसे कानूनी रूप से गठित समिति नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह व्याख्या का मुख्य नियम है कि जहां कोई कानून यह प्रावधान करता है कि कोई विशेष कार्य किसी निर्धारित तरीके से किया जाना चाहिए, तो इसे उसी तरीके से किया जाना चाहिए और किसी अन्य तरीके से नहीं।
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