प्राकृतिक खेती अपना कर अपने उत्पादों की गुणवत्ता और विपणन क्षमता में किसानों ने की बढ़ौतरी : प्रो. चंदेल

सिरमौर जिले के पच्छाद विकासखंड के अंतर्गत वासनी गांव में प्राकृतिक खेती पर एक किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्य कृषि विभाग और आत्मा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें प्रगतिशील किसानों, कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय , नौणी (सोलन) के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया

Oct 7, 2025 - 18:44
Oct 7, 2025 - 19:41
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प्राकृतिक खेती अपना कर अपने उत्पादों की गुणवत्ता और विपणन क्षमता में किसानों ने की बढ़ौतरी : प्रो. चंदेल
यंगवार्ता न्यूज़ - राजगढ़  07-10-2025
सिरमौर जिले के पच्छाद विकासखंड के अंतर्गत वासनी गांव में प्राकृतिक खेती पर एक किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राज्य कृषि विभाग और आत्मा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें प्रगतिशील किसानों, कृषि अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय , नौणी (सोलन) के कुलपति प्रो. राजेश्वर सिंह चंदेल ने बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया। अपने संबोधन में प्रो. चंदेल ने कृषि में रासायनिक आदनों पर निर्भरता को कम करने और वन हेल्थ की अवधारणा अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल उत्पादन लागत को कम करती है , बल्कि उत्पादक, उपभोक्ता और पर्यावरण। तीनों के स्वास्थ्य की रक्षा भी करती है। 
प्रो. चंदेल ने राज्यभर से कई उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे किसानों ने प्राकृतिक खेती अपना कर अपने उत्पादों की गुणवत्ता और विपणन क्षमता में वृद्धि की है। उन्होंने यह भी कहा कि इस पद्धति ने ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है , जिससे उनकी कृषि निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे अपने आसपास के उन किसानों के खेतों का भ्रमण करें जो प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं , ताकि वे इस पर्यावरण-अनुकूल विधि का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा प्राकृतिक खेती पर किए जा रहे अग्रणी शोध कार्यों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर इस पद्धति पर वैज्ञानिक डाटा तैयार कर रहा है , जिससे इसकी और अधिक स्वीकार्यता बढ़ेगी। आत्मा के परियोजना निदेशक डॉ. साहिब सिंह ने जिले में विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न प्राकृतिक कृषि की गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। 
उन्होंने बताया कि सिरमौर जिले के लगभग 60,000 किसानों में से 19,000 से अधिक किसानों ने पूर्ण या आंशिक रूप से प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं। उन्होंने राज्य सरकार की उन पहलों के बारे में भी बताया जिसके तहत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और विपणन सुविधाएँ उपलब्ध करवाई जा रही हैं। कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. राज कुमार ने कहा कि कृषि भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने किसानों के हित में चलाई जा रही विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे फसल बीमा , किसान क्रेडिट कार्ड और बुनियादी ढांचे के विकास योजनाओं की जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सिरमौर  धौला कुआं के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पंकज मित्तल ने जिले में प्रचलित फसलों को बढ़ावा देने और किसानों को प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन के माध्यम से सहयोग प्रदान करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला।
बीएफएसी पच्छाद के सदस्य ओम प्रकाश शर्मा ने कृषि विभाग के प्राकृतिक खेती क्षेत्र के विस्तार और किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती से संबंधित उत्पादों और इनपुट्स की एक प्रदर्शनी भी लगाई गई।कार्यक्रम में स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि, जिनमें प्रधान संजीव तोमर, डॉ. वाई.एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय एवं कृषि विभाग के अधिकारी , केवीके वैज्ञानिक , एसएमएस डॉ हीरा लाल , ब्लॉक टेक्नोलॉजी मैनेजर विनोद , सहायक टेक्नोलॉजी मैनेजर तथा 100 से अधिक किसानों ने भाग लिया, जिनमें कई प्रगतिशील किसान भी शामिल थे। 

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