मजदूरों का न्यूनतम वेतन 26 हज़ार रुपये घोषित करें सरकार , सीटू के राज्य सम्मेलन में श्रमिकों के मुद्दों पर मंथन 

हिमाचल होटल मजदूर लाल झंडा यूनियन संबंधित सीटू का 31वां सम्मेलन कालीबाड़ी हॉल शिमला में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में प्रताप चौहान को अध्यक्ष, कपिल नेगी को महासचिव, चेत राम को कोषाध्यक्ष, विक्रम शर्मा, रत्ती राम, विकास को उपाध्यक्ष, सुभाष, श्याम दीपटा, इंद्र सिंह को सचिव एवं पूर्ण चंद, विनोद बिरसांटा, रामलाल, शिशुपाल, धर्मपाल, मुकेश, महेंद्र, मनोहर शर्मा, राजेंद्र, प्रकाश, पवन, संतराम, शंकर लाल, वीरेंद्र , नीलकंठ, ईश्वर, अश्वनी, भीम प्रकाश, भीम सिंह को कमेटी सदस्य सहित तेंतीस सदस्यीय कमेटी का चयन किया गया

Mar 27, 2025 - 19:41
Mar 27, 2025 - 19:57
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मजदूरों का न्यूनतम वेतन 26 हज़ार रुपये घोषित करें सरकार , सीटू के राज्य सम्मेलन में श्रमिकों के मुद्दों पर मंथन 
यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  27-03-2025
हिमाचल होटल मजदूर लाल झंडा यूनियन संबंधित सीटू का 31वां सम्मेलन कालीबाड़ी हॉल शिमला में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में प्रताप चौहान को अध्यक्ष, कपिल नेगी को महासचिव, चेत राम को कोषाध्यक्ष, विक्रम शर्मा, रत्ती राम, विकास को उपाध्यक्ष, सुभाष, श्याम दीपटा, इंद्र सिंह को सचिव एवं पूर्ण चंद, विनोद बिरसांटा, रामलाल, शिशुपाल, धर्मपाल, मुकेश, महेंद्र, मनोहर शर्मा, राजेंद्र, प्रकाश, पवन, संतराम, शंकर लाल, वीरेंद्र , नीलकंठ, ईश्वर, अश्वनी, भीम प्रकाश, भीम सिंह को कमेटी सदस्य सहित तेंतीस सदस्यीय कमेटी का चयन किया गया।
 सम्मेलन को संबोधित करते हुए विजेंद्र मेहरा, जगत राम, कुलदीप डोगरा व बालक राम ने कहा कि मजदूरों का न्यूनतम वेतन 26 हज़ार रुपये घोषित करने , मजदूर विरोधी चार लेबर कोडों , नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन , अग्निवीर , आयुद्धवीर , कोयलावीर व अन्य फिक्स टर्म रोज़गार को रद्द करने , ईपीएफ, ईपीएस, ईडीएलआई सुविधा की अवहेलना करने पर सज़ा शर्तों में कटौती करने, असंगठित मजदूरों के लिए सार्वभौमिक व्यापक सामाजिक सुरक्षा देने, ठेका मजदूरों की रोज़गार सुरक्षा सुनिश्चित करने, उन्हें नियमित कर्मियों के बराबर वेतन देने, केंद्रीय व प्रदेश सरकार के बोर्ड व निगम कर्मियों की ओपीएस बहाल करने, न्यूनतम पेंशन 9 हज़ार लागू करने की मांग की। 
उन्होंने मनरेगा व निर्माण मजदूरों के श्रमिक कल्या बोर्ड से आर्थिक लाभ व पंजीकरण सुविधा बहाल करने, एसटीपी मजदूरों के लिए शेडयूल एम्प्लॉयमेंट घोषित करने, आउटसोर्स व अस्पताल कर्मियों के लिए नीति बनाने, औद्योगिक मजदूरों को 40 प्रतिशत अधिक वेतन देने, तयबजारी को उजाड़ने के खिलाफ, काम के घण्टे 8 से बढ़ाकर 12 घण्टे करने के खिलाफ, आईटी, आईटीईएस उद्योगों को श्रम कानूनों से छूट देने के खिलाफ, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने, स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों कल लागू करने, शहरी क्षेत्रों में विस्तार के साथ ही मनरेगा में 600 रुपये प्रति दिन की मजदूरी पर 200 दिन कार्य दिवस प्रदान करने, मनरेगा, निर्माण तथा बीआरओ मजदूरों का श्रमिक कल्याण बोर्ड में पंजीकरण व आर्थिक लाभ बहाल करने, आउटसोर्स कर्मियों के लिए नीति बनाने, प्रदेशभर में नौकरी से निकाले गए सैंकड़ों कोविड कर्मियों को बहाल करने, भारी महंगाई पर रोक लगाने, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को रोकने, किसानों की कर्ज़ा मुक्ति आदि मांगों को लेकर सीटू मजदूरों व जनता में जाएगी तथा उनसे मजदूर व मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ 20 मई को राष्ट्रव्यापी हड़ताल होगी। 
उन्होंने कहा है कि केन्द्र की मोदी सरकार की नवउदारवादी व पूंजीपति परस्त नीतियों के कारण बेरोजगारी, गरीबी, असमानता व रोजी रोटी का संकट बढ़ रहा है। बेरोजगारी व महंगाई से गरीबी व भुखमरी बढ़ रही है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कमज़ोर करने के कारण बढ़ती मंहगाई ने जनता की कमर तोड़ कर रख दी है। पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस, खाद्य वस्तुओं के दामों में भारी वृद्धि हो रही है। उन्होंने न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रति माह और सभी श्रमिकों को पेंशन सुनिश्चित करने; मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं और बिजली संशोधन विधेयक को निरस्त करने, कॉन्ट्रेक्ट, पार्ट टाइम, मल्टी पर्पज, मल्टी टास्क, टेम्परेरी, कैज़ुअल, फिक्स टर्म, ठेकेदारी प्रथा व आउटसोर्स प्रणाली पर रोक लगाकर इन सभी मजदूरों को नियमित करने, शहरी क्षेत्रों में विस्तार के साथ मनरेगा में 600 रुपये प्रति दिन की मजदूरी पर 200 दिन कार्य दिवस प्रदान करने, मनरेगा, निर्माण तथा बीआरओ मजदूरों की मांगों को जनता में ले जाया जाएगा। मोदी सरकार की मजदूर, कर्मचारी, किसान व जन विरोधी नीतियों के कारण जनता से भाजपा व मोदी के खिलाफ वोट की अपील की जाएगी। 
उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण व विनिवेश, नेशनल मोनेटाइजेशन पाइपलाइन व अग्निपथ योजना, महंगाई और डिपुओं में राशन प्रणाली, आंगनबाड़ी, मिड डे मील, आशा कर्मियों, बिजली बोर्ड, नगर निगमों, अन्य बोर्डों व निगमों के कर्मचारियों के ओपीएस, बीआरओ के निजीकरण व नियमितीकरण, स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट, मोटर व्हीकल एक्ट में मजदूर व मालिक विरोधी बदलाव आदि मुद्दों पर मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों का पर्दाफाश किया जाएगा।

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