यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 14-03-2025
आर्थिक सुधारों के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के प्रयास रंग लाने लगे हैं। गुरुवार को विधानसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था की बहुत ही सकारात्मक तस्वीर सामने रखी है। हिमाचल में प्रति व्यक्ति आय और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में अपेक्षा से ज्यादा वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्रीय अनुदान में कमी के बावजूद टैक्स और नॉन टैक्स रेवेन्यू में राज्य सरकार ने वृद्धि की है। हालांकि राजकोषीय स्थिरता के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। नए वित्त वर्ष का बजट प्रस्तुत करने से पहले गुरुवार को विधानसभा में रखी गई आर्थिक समीक्षा में कई और सुखद संकेत मिले हैं। मुख्यमंत्री के हमीरपुर दौरे के कारण उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सदन में रिपोर्ट रखी।
अच्छी बात यह है कि प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि दर्ज की गई है। प्रति व्यक्ति आय को राज्य की अर्धवार्षिक जनसंख्या द्वारा शुद्ध जीडीपी को विभाजित करके निकाला जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में प्रति व्यक्ति आय 2,57,212 रुपए हो गई है, जो पिछले साल 2,34,782 रुपए थी। इसमें 22,430 रुपए की बढ़ोतरी के साथ 9.6 फीसदी की वृद्धि हुई है। स्थिर भावों पर राज्य की जीडीपी वित्त वर्ष 2024-25 तक 1,46,553 करोड़ अनुमानित है। इसमें 6.7 फीसदी की वृद्धि हुई है। प्रचलित भाव पर सकल राज्य घरेलू उत्पाद 2,32,185 करोड़ होने का अनुमान है। हिमाचल की अर्थव्यवस्था में कृषि और बागवानी क्षेत्र का योगदान कम हुआ है, जबकि उद्योग और पर्यटन क्षेत्र का शेयर बढ़ा है। चिंता की बात यह है कि राज्य पर लोन का आंकड़ा एक लाख करोड़ के आसपास पहुंचने के कारण राजकोषीय घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है।
सरकार के खर्चे के मुकाबले राजस्व में कमी से राजस्व घाटा भी बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में राजकोषीय घाटा 10784 करोड़ और राजस्व घाटा 4514 करोड़ रहने का अनुमान है। आर्थिक समीक्षा में सरकार की ओर से कहा गया है कि इस स्थिति का सामना करने के लिए राज्य सरकार को राजस्व संग्रहण में वृद्धि करनी होगी। सरकार को अपने खर्चे का भी युक्तिकरण करना होगा, ताकि फिजूलखर्ची न हो। इसके साथ ही बुनियादी ढांचे और विकास में निवेश का भी सुझाव दिया गया है। रिपोर्ट बताती है कि केंद्रीय अनुदानों में कमी के बावजूद राज्य सरकार के टैक्स और नॉन टैक्स रेवेन्यू में बढ़ोतरी हुई है।
राहत की बात यह है कि टूरिज्म में हिमाचल ने कोविड से पहले वाले पर्यटकों के आंकड़े को छू लिया है और वर्तमान वित्त वर्ष में 1.81 करोड़ से ज्यादा पर्यटक हिमाचल आए हैं। बेरोजगारी दर और महंगाई दर के मामले में भी हिमाचल कई राज्यों से ठीक स्थिति में है। हिमाचल प्रदेश के मामले में मुद्रास्फीति दर अपेक्षाकृत स्थिर रही है। वित्त वर्ष 2023-24 की मुद्रास्फीति 5.0 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2024-25 में 4.2 प्रतिशत हो गई। इसी समय अवधि में ग्रामीण मुद्रास्फीति 5.1 प्रतिशत से घटकर 4.4 प्रतिशत, शहरी मुद्रास्फीति 4.7 प्रतिशत से घटकर 3.3 प्रतिशत हो गई है।
आर्थिक समीक्षा के बाद अब सोमवार सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू नए वित्त वर्ष का बजट पेश करेंगे। यह उनकी सरकार के कार्यकाल का तीसरा बजट होगा। अगले वित्त वर्ष में राजस्व घाटा अनुदान में भारी कटौती को देखते हुए राज्य सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं। इसी कारण सरकार 58,500 करोड़ के आसपास का बजट पेश कर सकती है। इस बजट में पूंजीगत व्यय के लिए कितना प्रावधान होता है, इस पर भी नजर रहेगी। ‘दिव्य हिमाचल टीवी’ पर इस बजट का लाइव प्रसारण भी होगा।