यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला 17-03-2025
हिमाचल प्रदेश में बिजली उत्पादन कर रहे केंद्रीय उपक्रमों ने अपनी परियोजनाओं के माध्यम से राज्य सरकार को पिछले वित्त वर्ष में कुल 1010.70 करोड़ रुपए दिए हैं। परियोजनाओं से सरकार ने अलग-अलग मापदंडों के साथ एमओयू कर रखे हैं। कहीं रॉयल्टी की बिजली तो कहीं लाडा में दिया जाने वाला पैसा। ऐसे में इन उपक्रमों ने प्रदेश सरकार को इतनी राशि पिछले वित्त वर्ष में चुकता की है, परंतु बिजली बोर्ड को जो इन्होंने मेंटेनेंस का पैसा देना है उसमें से 16 करोड़ 39 लाख रुपए की राशि अभी चुकता करनी है।
इतना ही नहीं, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कर्मचारी इन परियोजनाओं में जा सकते हैं, लेकिन इन नियमों को सही तरह से पूरा नहीं किया जा रहा है। बिजली बोर्ड के 63 कर्मचारी अभी तक केवल एसजेवीएनएल और बीबीएमबी ने अपने यहां प्रतिनियुक्ति पर रखे हैं, जबकि दूसरे दो-तीन उपक्रमों ने ऐसा नहीं किया है। केंद्रीय उपक्रमों से जुड़ी जानकारी जो सामने आई है उसके अनुसार हिमाचल प्रदेश में एनटीपीसी, एसजेवीएनएल, एनएचपीसी एवं बीबीएमबी के प्रोजेक्टों के माध्यम से बिजली का उत्पादन कर रहे हैं।
कुल 63 अधिकारी व कर्मचारी प्रतिनियुक्ति में इनमें बिजली बोर्ड से भेजे गए हैं, लेकिन कोई भी अधिकारी या कर्मचारी इनमें मर्ज नहीं हुआ है। वर्तमान में इन पावर प्रोजेक्ट से कुल 16 करोड़ 39 लाख 29 हजार 285 रुपए का शुल्क लिया जाना शेष है। यह राशि पिछले साल 2023-24 की है और इसको लेने के लिए एक साल से ऊपर का समय हो चुका है। इन परियोजनाओं के पक्ष में दस मार्च 2025 तक कुल 551,41,65,063 रुपए की धनराशि हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड द्वारा सेल ऑफ पावर के रूप में दी जानी है।