प्रदेश में केंद्रीय सडक़ एवं अवसंरचना निधि के प्रोजेक्ट्स को पूरा करना बना चुनौती 

प्रदेश में केंद्रीय सडक़ एवं अवसंरचना निधि (सीआरआईएफ) के प्रोजेक्ट्स को पूरा करना चुनौती बन गया है। केंद्र की ओर से मिल रही राशि से कहीं अधिक खर्च योजनाओं पर हो रहा

Jan 15, 2026 - 15:53
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प्रदेश में केंद्रीय सडक़ एवं अवसंरचना निधि के प्रोजेक्ट्स को पूरा करना बना चुनौती 

यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला    15-01-2026

प्रदेश में केंद्रीय सडक़ एवं अवसंरचना निधि (सीआरआईएफ) के प्रोजेक्ट्स को पूरा करना चुनौती बन गया है। केंद्र की ओर से मिल रही राशि से कहीं अधिक खर्च योजनाओं पर हो रहा है। बड़ी बात यह है कि इस वित वर्ष में स्वीकृत प्रोजेक्ट्स को मंजूर राशि से समय पर पूरा कर पाना संभव नहीं है और करोड़ों रुपयों की आवश्यकता रहेगी। 

प्रदेश में सीआरआईएफ के प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने में पेश आ रही इस बड़ी परेशानी को लेकर सरकार स्तर पर मंथन भी आरंभ हो गया है। हिमाचल प्रदेश को बीते छह वर्षों में सीआरआईएफ के तहत मिलने वाला वार्षिक आबंटन लगातार बढ़ा है।श वर्ष 2020-21 में राज्य को 97.27 करोड़ रुपए का आबंटन मिला, जबकि 2021-22 में यह 99.74 करोड़, 2022-23 में 117.73 करोड़, 2023-24 में 136.32 करोड़, 2024-25 में 130.95 करोड़ और 2025-26 में 143.77 करोड़ रहा। 

सीआरआईएफ के तहत अब तक राज्य में कुल 201 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनकी कुल लागत लगभग 2691.57 करोड़ रुपए आंकी गई है। इनमें से सेतु बंधन योजना के अंतर्गत चार पुल परियोजनाएं भी शामिल हैं और जिन पर करीब 231.29 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए है।

अब तक 157 परियोजनाएं पूरी कर ली गई हैं, जिनकी लागत 1046.81 करोड़ रुपए है, जबकि लगभग 1599 करोड़ रुपए की लागत 33 परियोजनाएं अभी प्रगति पर हैं। नवंबर 2025 तक राज्य में सीआरआईएफ के तहत कुल संचयी व्यय 1575.04 करोड़ हो चुका है, जबकि इस अवधि में केंद्र द्वारा 1457.23 करोड़ की राशि जारी की गई है। 

इसके अलावा लगभग 117.81 करोड़ की राशि अभी जारी होना शेष है। जबकि मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही सीआरआईएफ परियोजनाओं पर बड़ी राशि की आवश्यकता रहेगी। बता दें कि सीआरआईएफ फंड का गठन केंद्रीय सडक़ निधि अधिनियम, 2000 के तहत किया गया है। 

इस निधि का उपयोग राष्ट्रीय राजमार्गों, मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड, ग्रामीण और शहरी सडक़ों, रेलवे क्रॉसिंग की सुरक्षा तथा अन्य सडक़ अवसंरचना के विकास और रखरखाव के लिए किया जाता है। इस फंड में पेट्रोल, हाई स्पीड डीजल सहित अन्य ईंधनों पर लगने वाले उपकर और शुल्क से राशि एकत्र की जाती है।

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