श्री रेणुका जी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पथ संचलन , आरएसएस के 100 वर्ष होने पर दिखा उत्साह 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वार्षिक विजयादशमी उत्सव कुब्जा परिसर श्री रेणुका जी में हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में महामंडलेश्वर श्री श्री दयानंद भारती तथा मुख्य वक्ता के रूप में सोमदत्त , सह विभाग कार्यवाह (सोलन विभाग) उपस्थित रहे। इस अवसर पर श्री रेणुका जी खंड के खंड संघचालक नंदलाल जी भी मंचासीन रहे

Oct 12, 2025 - 16:39
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श्री रेणुका जी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पथ संचलन , आरएसएस के 100 वर्ष होने पर दिखा उत्साह 
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यंगवार्ता न्यूज़ - श्रीरेणुकाजी  12-10-2025

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का वार्षिक विजयादशमी उत्सव कुब्जा परिसर श्री रेणुका जी में हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में महामंडलेश्वर श्री श्री दयानंद भारती तथा मुख्य वक्ता के रूप में सोमदत्त , सह विभाग कार्यवाह (सोलन विभाग) उपस्थित रहे। इस अवसर पर श्री रेणुका जी खंड के खंड संघचालक नंदलाल जी भी मंचासीन रहे। 
अपने उद्बोधन में सोमदत्त ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा विजयादशमी के पावन दिवस पर की गई थी। उन्होंने कहा कि संघ ने अपने शताब्दी की यात्रा में तीन बार प्रतिबंधों का सामना किया, किंतु सेवा, अनुशासन और संस्कारों की शक्ति से यह आज समाज निर्माण की प्रेरक धारा बन चुका है। उन्होंने बताया कि संघ पर महात्मा गांधी की हत्या का झूठा आरोप लगाया गया था, किंतु सत्य की विजय अंततः हुई। 
उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सशक्तता सरकारों से नहीं, बल्कि संस्कारों से आती है। संघ का मूल कार्य शाखा है, और शाखा के माध्यम से समाजोपयोगी, चरित्रवान और देशभक्त नागरिकों का निर्माण किया जाता है। उन्होंने कहा कि आज पश्चिमी सभ्यता की कुरीतियाँ हमारे समाज में प्रवेश कर रही हैं, जिसके कारण परिवारों में बुजुर्गों की उपेक्षा बढ़ रही है। ऐसे समय में संघ समाज में नैतिकता, पर्यावरण संरक्षण और कुटुंब प्रबोधन जैसे मूल्यों के संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। 
उन्होंने बताया कि संघ अपने शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर होते हुए पंच परिवर्तन—कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण, नागरिक कर्तव्य, सामाजिक समरसता और स्वदेशी—के संकल्प पर कार्य कर रहा है। कार्यक्रम के उपरांत कुब्जा परिसर से किसान भवन, ददाहू तक भव्य पथ संचलन निकाला गया। सैकड़ों स्वयंसेवकों ने अनुशासित पंक्तियों में भाग लेकर राष्ट्रीय एकता, अनुशासन और संगठन शक्ति का परिचय दिया। इसके पश्चात सभी स्वयंसेवक पुनः कुब्जा परिसर में एकत्रित हुए, जहाँ कार्यक्रम का समापन हुआ l

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