ज़मीन से बेदखली और अन्य मांगों को लेकर शिमला में किसानों ने किया रोष प्रदर्शन  

भूमि नियमितिकरण और अन्य मांगों को लेकर प्रदेश भर से आए किसानों और बागवानों ने प्रदेश की राजधानी शिमला ज़ोरदार प्रदर्शन किया। हज़ारों की संख्या में जुटे किसान और बागवान मांगों की तख्तियां और बैनर लेकर जलूस की शक्ल में पंचायत भवन से अम्बेडकर चौक पहुंचे और प्रदर्शन किया। रैली को सम्बोधित करते हुए किसान नेता और शिमला से पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सभी बेदखलियां नियमों की अवहेलना करके की जा रही है

Mar 20, 2025 - 19:57
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ज़मीन से बेदखली और अन्य मांगों को लेकर शिमला में किसानों ने किया रोष प्रदर्शन  
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यंगवार्ता न्यूज़ - शिमला  20-03-2025

भूमि नियमितिकरण और अन्य मांगों को लेकर प्रदेश भर से आए किसानों और बागवानों ने प्रदेश की राजधानी शिमला ज़ोरदार प्रदर्शन किया। हज़ारों की संख्या में जुटे किसान और बागवान मांगों की तख्तियां और बैनर लेकर जलूस की शक्ल में पंचायत भवन से अम्बेडकर चौक पहुंचे और प्रदर्शन किया। रैली को सम्बोधित करते हुए किसान नेता और शिमला से पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सभी बेदखलियां नियमों की अवहेलना करके की जा रही है। उन्होंने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी बाबू राम बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य टाइटल वाली एसएलपी में भूमि से बेदखली को अवैध , बिना किसी स्पष्ट आदेश के किया गया तथा नेचुरल जस्टिस के सिद्धांतों का उल्लंघन माना है। 
सिंघा ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में डीएफओ कोर्ट द्वारा सार्वजनिक पब्लिक परमिसिस एक्ट के तहत हजारों बेदखली आदेश दिए गए तथा हिमाचल प्रदेश के डिविज़नल कमिश्नर और उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें बरकरार रखा गया। माानीय सर्वोच्च न्यायालय ने अब इन्हें रद्द कर दिया गया है या हिमाचल उच्च न्यायालय को वापस भेज दिया गया है। परन्तु ये बेदखली अभी भी जारी है और राज्य के विभिन्न भागों में कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना तथा उचित सीमांकन किए बिना आवासीय मकानों को सील किया जा रहा है। यहां तक कि उन मकानों को भी नहीं बख्शा जा रहा है जो नौतोड़ पॉलिसी के तहत स्वीकृत भूमि पर बनाए गए हैं। किसान सभा के राज्याध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तँवर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भूकंप, बादल फटना, अचानक बाढ़ आना, ग्लेशियरों का पिघलना और खिसकना, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं जिसके परिणामस्वरूप कृषि भूमि का नुकसान होता है। 
पिछले दो वर्षों में बहुत बड़े पैमाने पर ज़मीनों का नुकसान हुआ है और कुछ किसानों की सारी ज़मीन नष्ट हो चुकी है यहां तक कि घर बनाने के लिए भी ज़मीन नहीं बच पाई। ऐसे में बेदखली करना जीने के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि सरकार जल विद्युत परियोजनाओं, राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेस-वे, हवाई अड्डों तथा अन्य विकासात्मक गतिविधियों के निर्माण के कारण भूमि अधिग्रहण में पुनर्वास एवं पुनसर््थापन में उचित मुआवज़ा तथा पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के प्रावधानों को लागू किए बिना भूमि अधिग्रहण कर रही है जो किसी भी कीमत पर मंज़ूर नहीं है। 
वहीं सेब उत्पादक संघ के सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने वर्ष 2000 में भूमि राजस्व अधिनियम 1953 में धारा 163। को शामिल करके संशोधन किया था, जिसके तहत 1,67,339 किसानों ने शपथ पत्र भरकर अतिक्रमित सरकारी भूमि के नियमितीकरण के लिए आवेदन किया था और दावा किया था कि वे अतिक्रमित सरकारी भूमि के मालिक हैं। इस अधिनियम के खिलाफ एक रिट याचिका हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में लंबित है, जिस पर अभी अंतिम आदेश आना बाकी है, लेकिन इसके बावजूद भी ऐसे किसानों को पब्लिक परमिसिस एक्ट के तहत कब्ज़े वाली भूमि खाली करने के लिए नोटिस दिए जा रहे हैं।   

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