प्रदेश में 779 पदोन्नत प्रधानाचार्य विद्यालय की प्रतिक्षा में और विभाग चुनिंदा शिक्षकों को दे रहा सेवा विस्तार

सोलन के बाद अब जिला सिरमौर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कलोह में प्रधानाचार्य की सेवा विस्तार का मामला उजागर हुआ है। शिक्षा विभाग में राज्य तथा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों हेतु क्रमशः एक तथा दो वर्ष के सेवा विस्तार का प्रावधान है , परंतु अपुष्ट प्राप्त सूचना के अनुसार उक्त प्रधानाचार्य को इस प्रकार का कोई पुरस्कार नहीं मिला है

Feb 21, 2026 - 19:53
Feb 21, 2026 - 20:01
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प्रदेश में 779 पदोन्नत प्रधानाचार्य विद्यालय की प्रतिक्षा में और विभाग चुनिंदा शिक्षकों को दे रहा सेवा विस्तार
Paras School The Rose Orchid World School Admission Doon Valley Deeserve Media
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यंगवार्ता न्यूज़ - नाहन  21-02-2026

सोलन के बाद अब जिला सिरमौर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कलोह में प्रधानाचार्य की सेवा विस्तार का मामला उजागर हुआ है। शिक्षा विभाग में राज्य तथा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों हेतु क्रमशः एक तथा दो वर्ष के सेवा विस्तार का प्रावधान है , परंतु अपुष्ट प्राप्त सूचना के अनुसार उक्त प्रधानाचार्य को इस प्रकार का कोई पुरस्कार नहीं मिला है। 
हिमाचल प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ राज्य चेयरमैन सुरेंद्र पुंडीर , राज्य विशिष्ट सदस्य नरेंद्र नेगी , जिला अध्यक्ष डॉक्टर आई डी राही ,राज्य संरक्षक रमेश नेगी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय शर्मा , महिला विंग सिरमौर अध्यक्ष संध्या चौहान, जिला सिरमौर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा , महासचिव दिनेश शर्मा , कोषाध्यक्ष लाल सिंह ठाकुर तथा अन्य सभी राज्य एवं जिला कार्यकारिणी सदस्यों ने आरोप तो यह भी लगाए कि उक्त प्रधानाचार्य अपनी पहुंच के प्रभाव से इस विस्तार को बार बार आगे बढ़ाने का भी प्रयास कर रही हैं। 
गौर हो कि उक्त विद्यालय में प्रधानाचार्य एवं कुछ शिक्षकों के मध्य संबंध सौहार्दपूर्ण नहीं है तथा कुछ ऐसे मामलों में विभागीय जांच जारी हैं। ऐसे हालात में सेवा विस्तार हेतु लोकहित का हवाला देना कुछ लोगों को रास अभी आ रहा है। हिमाचल प्रदेश विद्यालय  प्रवक्ता संघ ने कहा कि जब विभाग के पास लगभग 800 पदोन्नत प्रधानाचार्य जनवरी से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे है तो  इस हालात में इस प्रकार के सेवा विस्तार का कोई औचित्य नहीं हैं तथा इस प्रकार को व्यवस्था से कनिष्ठ वर्ग के प्रवक्ताओं एवं मुख्य अध्यापकों की पदोन्नति पर प्रभाव पड़ेगा।

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