सुंदरनगर राज्य स्तरीय नलवाड़ मेले के उद्घाटन में गैर-संवैधानिक व्यक्ति की भागीदारी पर उठे सवाल 

विधानसभा में विधायक राकेश जम्वाल ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर के तहत सुंदरनगर राज्य स्तरीय नलवाड़ मेले के उद्घाटन में गैर-संवैधानिक व्यक्ति की भागीदारी का मुद्दा उठाया

Mar 21, 2025 - 15:59
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सुंदरनगर राज्य स्तरीय नलवाड़ मेले के उद्घाटन में गैर-संवैधानिक व्यक्ति की भागीदारी पर उठे सवाल 

यंगवार्ता न्यूज़ - सुन्दरनगर    21-03-2025

विधानसभा में विधायक राकेश जम्वाल ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर के तहत सुंदरनगर राज्य स्तरीय नलवाड़ मेले के उद्घाटन में गैर-संवैधानिक व्यक्ति की भागीदारी का मुद्दा उठाया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानिया और उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने संज्ञान लेने का आश्वासन दिया है।

सुंदरनगर में आयोजित होने वाला यह राज्य स्तरीय नलवाड़ मेला, जो कभी उत्तर भारत का सबसे बड़ा नलवाड़ मेला था, वर्षों से प्रदेश सरकार के मंत्रियों, मुख्यमंत्री और विधायकों की उपस्थिति में उद्घाटन एवं समापन समारोह के रूप में आयोजित होता रहा है।

पूर्व में भी मंडी जिले में सत्ता परिवर्तन के बाद द्रंग विधानसभा और सुंदरनगर में ऐसी घटनाएँ सामने आई थीं, जहां हारे हुए प्रत्याशियों के नाम उद्घाटन पट्टिकाओं पर अंकित किए गए थे। यह विषय विधानसभा में उठाया गया था, जिस पर स्वयं मुख्यमंत्री ने जवाब दिया था और स्पष्ट निर्देश दिए थे कि प्रदेश में किसी भी सरकारी कार्यक्रम या उद्घाटन समारोह में कोई गैर-संवैधानिक व्यक्ति शामिल नहीं होगा।

लेकिन अब, सुंदरनगर राज्य स्तरीय नलवाड़ मेले के उद्घाटन समारोह में एक ऐसा व्यक्ति मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहा है, जो दो बार चुनाव हार चुका है और किसी संवैधानिक पद पर नहीं है। यह न केवल मुख्यमंत्री के निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि एक स्थापित परंपरा का भी अपमान है। 

मेला समिति का अध्यक्ष स्थानीय एसडीएम होता है, जो एक प्रशासनिक अधिकारी है, फिर भी इस प्रकार के निर्णय लिए जा रहे हैं। यह हैरानीजनक है कि जब से मुख्यमंत्री ने अपने निर्देश दिए थे, तब से प्रदेश में कहीं भी किसी उद्घाटन पट्टिका या समारोह में गैर-संवैधानिक व्यक्ति को स्थान नहीं दिया गया। फिर सुंदरनगर राज्य स्तरीय नलवाड़ मेले में इस तरह की अनियमितता क्यों हो रही है?

हम सरकार से मांग करते हैं कि इस मामले पर तुरंत संज्ञान लिया जाए और सुनिश्चित किया जाए कि सरकारी कार्यक्रमों और राज्य स्तरीय आयोजनों में केवल संवैधानिक पदों पर आसीन जनप्रतिनिधियों से ही कार्यक्रम की अध्यक्षता करवाई जाए।

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